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📌 मुख्य बिंदु (Key Highlights):
भारत में बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए ‘दो बच्चों के नियम’ पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि देश में लगातार गिरती प्रजनन दर (Total Fertility Rate) को देखते हुए दो से अधिक बच्चे पैदा करने पर दंडात्मक कार्रवाई या स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने से रोकने वाले कानूनों की प्रासंगिकता अब खत्म हो चुकी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि भारत में जनसंख्या सुस्ती का चक्र शुरू हो चुका है, जिसे बाद में संभालना बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने माना कि आबादी नियंत्रण के नाम पर बनाए गए ये कड़े नियम नागरिकों, विशेषकर महिलाओं के मौलिक अधिकारों और उनकी प्रजनन स्वायत्तता का उल्लंघन करते हैं। अदालत के अनुसार, अति-उत्साह में लागू की गई ऐसी नीतियां भविष्य में गंभीर जनसांख्यिकीय संकट (Demographic Crisis) पैदा कर सकती हैं, जिससे देश की युवा आबादी का संतुलन बिगड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद अब कई राज्यों में पंचायत और निकाय चुनावों में लागू दो बच्चों की शर्त को लेकर नए सिरे से बहस छिड़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राष्ट्रीय स्तर पर प्रजनन दर प्रति महिला 2.1 के प्रतिस्थापन स्तर से नीचे गिरती है, तो भारत को भविष्य में बूढ़ी होती आबादी और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।